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पटना में नीट छात्रा की मौत: सड़कों से सदन तक उबाल, सरकार की जवाबदेही पर उठे तीखे सवाल

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पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत अब महज एक घटना नहीं रही, बल्कि यह राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, छात्राओं के मानसिक दबाव और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। मंगलवार को राजधानी की सड़कों पर जो तस्वीर दिखी, उसने साफ कर दिया कि आक्रोश अब सीमाओं में नहीं है।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के विरोध में AISA और AIPWA के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। गांधी मैदान से शुरू हुआ यह विरोध मार्च विधानसभा की ओर बढ़ रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार और प्रशासन लगातार ऐसी घटनाओं को हल्के में ले रहा है, जिससे छात्राएं खुद को असुरक्षित और असहाय महसूस कर रही हैं।
डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी, लेकिन गुस्से में भरे लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे। देखते ही देखते बैरिकेडिंग टूट गई और हालात तनावपूर्ण हो गए। खासकर महिला कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ झलक रहा था। उनका कहना था कि “बेटी बचाओ” जैसे नारे अब सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गए हैं, जमीन पर हकीकत कुछ और है।
प्रदर्शन के दौरान सरकार और एनडीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। यह मार्च केवल एक छात्रा की मौत का विरोध नहीं था, बल्कि महिलाओं, छात्राओं और बच्चियों के साथ बढ़ती हिंसा और संस्थागत उदासीनता के खिलाफ सामूहिक आवाज बन गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और कोचिंग हब्स व हॉस्टलों में छात्राओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर ठोस व्यवस्था लागू की जाए।
सदन के भीतर भी गरमाया मुद्दा
उधर, बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और इस मुद्दे की गूंज सदन के भीतर भी सुनाई दे रही है। विपक्षी दल लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि छात्रा की मौत पर सरकार संवेदनशीलता दिखाने के बजाय राजनीतिक दबाव और पुलिस कार्रवाई के जरिए सवाल उठाने वालों की आवाज दबा रही है।
इसी कड़ी में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि पप्पू यादव छात्रा की मौत के मामले को मुखरता से उठा रहे थे, इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया। खुद पप्पू यादव ने भी दावा किया है कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
एक सवाल जो अब हर गली में है
पटना की सड़कों से लेकर विधानसभा तक उठ रही आवाजें एक ही सवाल पूछ रही हैं—क्या छात्राओं की मौत पर सिर्फ बयानबाजी होगी या सिस्टम में कोई वास्तविक बदलाव भी दिखेगा? नीट छात्रा की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिहार में शिक्षा के दबाव, सुरक्षा की कमी और प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा सबसे ज्यादा युवा छात्राएं भुगत रही हैं। अब देखना यह है कि यह उबाल सिर्फ खबरों तक सिमटता है या किसी ठोस कार्रवाई का रास्ता खोलता 

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